फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। सृजना साहित्यिक संस्था, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में भारत के संविधान शिल्पी एवं महान समाज सुधारक भीम राव अम्बेडकर की जयंती शारदा संगीत महाविद्यालय में साहित्यिक एवं बौद्धिक गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने बाबा साहब के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनके लेखन, चिंतन और सामाजिक योगदान पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दयाराम मौर्य ‘रत्न’ ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि आर्थिकी, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता, नारी सशक्तिकरण और भेदभावमुक्त समाज के प्रबल प्रवक्ता थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने समाज की विषमताओं को दूर करने के लिए आजीवन संघर्ष किया और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। इस दौरान उन्होंने अपने स्वरचित महाकाव्य ‘रत्न भास्कर’ का प्रभावशाली वाचन करते हुए उसके विभिन्न आयामों की समीक्षा भी प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. शाहिदा ने अपने संबोधन में कहा कि अंबेडकर का दर्शन समाज का मौलिक दर्शन है, जो समानता, न्याय और स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे। अति विशिष्ट अतिथि रोशन लाल ऊमरवैश्य ने कहा कि बाबा साहब आम जनमानस की आवाज थे, जिन्होंने शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को एक सशक्त स्वर दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि आनन्द मोहन ओझा ने कहा कि अंबेडकर समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के पथप्रदर्शक थे और उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और संकल्प का अद्भुत उदाहरण है। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों द्वारा अंबेडकर पर केंद्रित काव्यपाठ ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। इस अवसर पर राजेश प्रतापगढ़ी, राज नारायण ‘राजन’, सुप्रिया पांडेय, मो. अनीश, राजकुमार, राधेश्याम ‘दीवाना’, प्रेमकुमार त्रिपाठी ‘प्रेम’, कुंजबिहारी ‘काकाश्री’, श्रीनाथ ‘सरस’ एवं अमरनाथ ‘बेजोड़’ सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बाबा साहब के विचारों को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से सभी प्रतिभागी साहित्यकारों को ‘अंबेडकर स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अनिल कुमार निलय ने किया। इस अवसर पर राजीव कुमार आर्य, राकेश कनौजिया, सुनील कुमार, विवेक कुमार, रोहित सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल बाबा साहब के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया, बल्कि समाज में समता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश भी दिया। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
