- सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में डिलीवरी जरूरी: डॉक्टरों की सलाह
- गर्भवती महिलाओं के लिए एंटी-नेटल चेकअप का महत्व
- नवजात शिशुओं की देखभाल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका
- आधुनिक सुविधाओं से 90% नवजातों को बचाया जा सकता है
- डिलीवरी में लापरवाही से बढ़ सकता है जटिलताओं का खतरा
- मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए सही अस्पताल का चयन जरूरी
प्रयागराज जनपद के हंडिया स्थित शकुंतला चाइल्ड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने सुरक्षित प्रसव को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है।
डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में ही कराना बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान नियमित एंटी-नेटल चेकअप और ऐसे अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराया जाना चाहिए जहाँ डिलीवरी के साथ-साथ नवजात शिशु की बेहतर देखभाल की सुविधा उपलब्ध हो।
डॉक्टरों ने बताया कि आजकल पैदा होने वाले कई नवजात काफी संवेदनशील होते हैं और जन्म के तुरंत बाद उनकी स्थिति का सही आकलन केवल अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) ही कर सकते हैं।
अस्पताल में प्रशिक्षित स्टाफ, आधुनिक उपकरण और नियोनेटोलॉजी सुविधाएँ उपलब्ध होने पर लगभग 90 प्रतिशत नवजात शिशुओं को समय रहते बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि बच्चे को जन्म के बाद ऑक्सीजन की कमी या अन्य जटिलताएँ होती हैं और समय पर उपचार न मिले, तो उसकी स्थिति गंभीर हो सकती है तथा मस्तिष्क, किडनी और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
डॉक्टरों ने सभी गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि सुरक्षित प्रसव के लिए केवल सुविधा-संपन्न अस्पताल का ही चयन करें, ताकि माँ और बच्चे दोनों का जीवन सुरक्षित रह सके। देखे प्रयागराज से प्रदीप मिश्रा की रिपोट 
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