जहांगीराबाद। श्रीधाम वृंदावन से पधारे भागवत वक्ता आचार्य मनीष कौशिक ने कथा के अंतिम दिन सरल और प्रभावशाली संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक दिव्य तत्व है, जो हमें जीवन के हर क्षेत्र में सीखने की प्रेरणा देता है।
व्यासपीठ से उन्होंने दत्तात्रेय भगवान के 24 गुरुओं का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रकृति और जीवन की हर वस्तु हमें कुछ न कुछ सिखाती है। पृथ्वी से धैर्य, जल से शुद्धता और सूर्य से निरंतर कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की रक्षा केवल नारे लगाने से नहीं, बल्कि धर्म के पालन से होगी। हिंदू जीवनशैली वैज्ञानिक है और व्रत-उपवास शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में उन्होंने समाज को तीन सरल संदेश दिए—गंगा जैसी पवित्रता, गायत्री जैसी शुद्ध बुद्धि और गुरु के मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि बड़े बदलाव छोटे-छोटे संकल्पों से ही संभव हैं। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाए, तो समाज स्वतः सशक्त होगा।
इस अवसर पर समाजसेवी शिवा विजय ने आचार्य मनीष कौशिक से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में गौरव बंसल, मोहित अग्रवाल, सौरभ विरदी, जीतू वर्मा, गौरव सिसौदिया, सूर्यप्रकाश बंसल, लकी शर्मा, मनु ओझा, आँचल वार्ष्णेय, रश्मि गर्ग,अंशुल गर्ग, सुनील सैनी, माधुरी वार्ष्णेय, पूनम बंसल, अंजलि सिसौदिया, वंदना जड़वाल आदि का विशेष सहयोग रहा।
रिपोर्ट नन्द किशोर शर्मा 151170853
