सफलता की कहानी
*प्राकृतिक खेती को अपनाकर महिला किसान ने बदली अपनी तकदीर*
*आलीराजपुर,07 अप्रैल 2026।* जिले के विकासखण्ड आलीराजपुर के ग्राम नानपुर मोरी फलिया की महिला किसान श्रीमती गनबाई ने प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
करीब 0.800 हेक्टेयर भूमि की मालिक श्रीमती गनबाई पहले पारंपरिक खेती पद्धतियों पर निर्भर थीं। वे पुराने बीजों का उपयोग करती थीं और बीजोपचार नहीं करती थीं जिससे खरीफ मौसम में ज्वार और कपास की खेती के बावजूद उत्पादन बेहद कम था। कपास मात्र 5 क्विंटल प्रति एकड़ और ज्वार लगभग 6 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन होता था। इसके साथ ही रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर अधिक खर्च होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
वर्ष 2019-20 में कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी के संपर्क में आने के बाद श्रीमती गनबाई को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी मिली। इसी दौरान उन्हें प्राकृतिक खेती की जानकारी मिली और विभागीय सहयोग से उनके खेत पर वर्मी कम्पोस्ट टांका निर्माण कराया गया, जिससे उन्होंने जैविक खाद बनाना शुरू किया। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, ब्रह्मास्त्र और घनामृत जैसे प्राकृतिक उत्पादों का निर्माण और उपयोग सीखकर खेती में अपनाया। इससे रासायनिक खाद और दवाइयों पर होने वाला खर्च लगभग समाप्त हो गया।
प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद श्रीमती गनबाई के खेत की उर्वरता में सुधार हुआ और फसल का उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता भी बेहतर हुई, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलने लगे। अब वे खरीफ के साथ-साथ रबी मौसम में गेहूं और चना की खेती भी कर रही हैं। खेती के साथ-साथ उन्होंने मुर्गी पालन और बकरी पालन जैसे सहायक व्यवसाय भी शुरू किए, जिससे उनकी आय के स्रोत बढ़े और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
श्रीमती गनबाई न केवल स्वयं प्राकृतिक खेती से लाभान्वित हुई हैं, बल्कि वर्तमान में अपने गांव के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। वे अपने अनुभव साझा कर उन्हें भी रसायन मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
फास्ट न्यूज इंडिया
पायल बघेल डिस्टिक इंचार्ज आलीराजपुर

