फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कासगंज । सेंट पॉल चर्च कंपाउंड स्थित मिशन हॉस्पिटल कासगंज में शिक्षण संस्थान में व्याप्त अनियमितताओं और यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद मचे घमासान ने अब कानूनी रूप ले लिया है। प्रिंसिपल अदनान को पोस्को एक्ट के तहत गठित टीम द्वारा दोषी पाए जाने के बाद सस्पेंड कर दिया गया है।हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, एक थर्ड ईयर की छात्रा द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए आई.सी.सी कमेटी का गठन किया गया था। इस जांच में प्रिंसिपल अदनान को दोषी पाया गया है। आरोप है कि इस पूरे मामले में प्रिंसिपल अदनान को संस्थान की स्टाफ ज्योति गुप्ता और उनके पति का संरक्षण प्राप्त था। साथ ही, ज्योति गुप्ता पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने, अपशब्दों का प्रयोग करने और आंतरिक परीक्षाओं में कम नंबर देने की धमकी देकर छात्रों को डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। संस्थान की मुख्य नीना लॉयल द्वारा प्रिंसिपल के खिलाफ 131 पेज की विस्तृत फाइल साक्ष्यों के साथ सबमिट की गई है। इस कार्रवाई के बाद, आगरा हेड वी.के. नायक (सेंट पॉल चर्च कंपाउंड) ने मुख्य नीना लॉयल के समस्त अधिकार वापस ले लिए हैं, जिसे लेकर कैंपस में भारी रोष है। निलंबन के बाद प्रिंसिपल अदनान ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली और कोर्ट ने उनका केस डिसमिस कर दिया है। अब निर्देश दिए गए हैं कि मामला डीएम स्तर पर निस्तारित किया जाए। निलंबन का नोटिस मिलने और आधिकारिक आदेशों के बावजूद, प्रिंसिपल अदनान अभी भी कैंपस स्थित अपने कमरे को खाली नहीं कर रहे हैं, जिससे छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है।छात्रों ने संस्थान की बदतर स्थिति को लेकर आवाज उठाई है। रिपोर्ट के अनुसार, 60 छात्रों की क्षमता वाली कक्षाओं में 15 से भी कम सीटें उपलब्ध हैं, जिससे पठन-पाठन कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अपनी इन समस्याओं और कैंपस में व्याप्त अराजकता के विरोध में छात्रों ने लामबंद होकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट संजय सिंह 151110069
