प्रथम भक्ति संतन कर संगा - महात्मा सुजाता बाई जी
परम प्रकाश का अनुभव करके जीवन को धन्य बनाए - महात्मा सार्थानंद
वाराणसी । विश्व आध्यात्मिक वाराणसी धर्मनगरी के अंतर्गत राजातालाब में मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा सर्व धर्म मंदिर आश्रम वाराणसी द्वारा दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह में द्वितीय दिन की शुरुआत सुबह 8:00 बजे से डीह बाबा मंदिर प्रांगण से सद्भावना शोभा यात्रा निकाली गई । इस में अनेक युवा, शाखा कार्यकर्ता व अनेक श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। अनेक कन्याओं द्वारा कलश यात्रा व महापुरुषों के चित्र के साथ जयघोष से राजातालाब पवित्र आध्यात्मिक स्पंदन से प्रफुल्लित हुआ। अनेक तीर्थ स्थलों से आए हुए संत समागम आदरणीय महात्मा धारा बाई, महात्मा सुजाता बाई जी ,महात्मा सारथानन्द, महात्मा चंदन बाई, एवं महात्मा महादेवी बाई के मार्गदर्शन में सदभावना पदयात्रा का समापन हुआ।
शाम को लगभग 4:00 बजे आध्यात्मिक सत्संग समारोह की शुरुआत हुई जिसमें स्थानीय विधायक जी के सुपुत्र श्री अदिति पटेल जी मुख्य अतिथि के रूप में आकर इस कार्यक्रम की शुरुआत की, स्थानीय प्रधान जी का भी इस कार्यक्रम के प्रति सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ। सिंगर मधु दीदी, त्रिभुवन भाई और शिवम्, विक्रांत जी इत्यादि सुमधुर भजनों के पश्चात् मानव धर्म के प्रणेता सदगुरु देव सतपाल महाराज के आत्म अनुभवी शिष्या महात्मा धारा बाई जी ने कहा......
"बड़े भाग मानुष तन पावा,
सुर दुर्लभ सद ग्रंथन गावा ।।
साधन धाम मोक्ष कर द्वारा
पाहिन जेहि पर लोक सावरा ।।"
रामायण में कहा गया है कि मनुष्य शरीर बड़े भाग्य से प्राप्त होता है यह देवताओं के लिए भी दुर्लभ है क्योंकि केवल मात्र मनुष्य शरीर में ही हम साधना करके ईश्वर का दर्शन प्राप्त कर सकते है। अतः हमारे सांसारिक कार्यों के साथ-साथ ईश्वर अपने हृदय मंदिर में दर्शन कर जीवन को सफल बनाएं।
महात्मा धारा सुजाता बाई ने अपने ओजस्वी सत्संग में कहा है कि "प्रथम भक्ति संतान कर संगा" कहां है कि अगर हमें ईश्वर की भक्ति, ईश्वर का दर्शन प्राप्त करना है तो सर्वप्रथम संतों के सानिध्य प्राप्त करना चाहिए। बिना संतों का मार्गदर्शन से
ईश्वर को पाना कठिन है।
इसीलिए यह अति आवश्यक है कि इस घोर कलयुग में भी जहां अधर्म का बोलबाला है ऐसे में हमें सच्चे संत के शरण में जाकर अपने हृदय स्थित परमेश्वर का दर्शन करे।
प्रयागराज से आए हुए महात्मा सार्थानंद जी ने अपने ओजस्वी और सारगर्भित सत्संग विचार में कहा है की 6 अप्रैल को माता राज राजेश्वरी देवी जी का पावन जन्मोत्सव पूरे देश में ही नहीं विदेशों में मनाया जा रहा है।
माता राजराजेश्वरी देवी ने सामाजिक कार्यों के साथ अंधकार में सोए हुए अनेकों जीवो को धर्म ग्रंथों के आधार पर प्रभु का दर्शन कराया है।
हम मां की स्तुति में कहते हैं......"या देवी सर्वभूतेषु प्रकाश रूपेण संस्थिता नमस्तसै नमस्तसै नमस्तसै नमो नमः" कहा गया है की मां प्रकाश रूप में हर जगह विद्यमान है, और इस प्रकाश को हमारे रामायण में कहा गया है कि "परम प्रकाश रूप दिन राती नहीं चाहिए कुछ दिया घृत बाती।"
हम सभी में वही परम प्रकाश विद्यमान है और उसी परम प्रकाश का अनुभव कर हमें अपने जीवन का कल्याण करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में जिला प्रधान सुरेंद्र यादव, मंडल प्रधान श्यामासरे पांडे, राजा तालाब के पंकज, आलोक, मानव सेवा दल जिला प्रमुख छोटे लाल यादव, मंडल प्रशिक्षक श्यामलाल कुशवाहा, हरिकेश, विनोद, संतोष, पूनम, वंदना, सीमा, बिंदु तथा अन्य सभी युवा कार्यकर्ताओं का सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का माइक संचालन पूनम आदेश के द्वारा किया गया ।। रविन्द्र गुप्ता
