फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ सेनानी ग्राम देवली में देवला देवी मंदिर पर चल रही श्री रामचरितमानस कथा में आचार्य करुणेश महाराज के श्री मुख से अमृत वर्षा हो रही है जिसमें भारी संख्या में महिला पुरुष कथा श्रवण कर रहे हैं। इस अवसर पर धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने पहुंचकर सर्वप्रथम मां देवला देवी मंदिर में नारायणी रामानुज दासी सहित शीश नवाकर कल्याण की कामना किया, तत्पश्चात कथा व्यास एवं आचार्य गणों तथा संगीतकारों को अंगवस्त्रम एवं दक्षिणा प्रदान करके कहा कि यह देवला मां का मंदिर रानी साहब देवली के द्वारा निर्मित कराया गया है। जिन्होंने माता चंडिका देवी धाम में चंडिका देवी का मंदिर एवं एक विशाल कुआं तथा रानीगंज अजगरा के पास लखपेड़वा में तथा कोटा लखपेड़ा भवानीगंज में एक लाख पेड़ लगवाए थे। गड़वारा के आगे कुशहा के पास भी रानी साहब ने एक विशाल कुंए का निर्माण कराया था जिसे रानी का इनारा कहते हैं। बाद में अंग्रेजों द्वारा यह रियासत प्रतापगढ़ के राजा अजित प्रताप सिंह को प्रदान कर दी गई। रानी साहब बहुत ही धार्मिक थी। रानी साहब की समाधि आज भी मेरी जमीन में बनी हुई है जो देवली रियासत द्वारा पूर्वजों को प्राप्त हुई थी। हमारे पूर्वज पंडित परसन पांडे इस रियासत के प्रथम पुजारी एवं राजगुरु थे। मेरे बाबा के बड़े भाई पंडित राम रतन पांडे भी प्रतापगढ़ रियासत के मंदिर में पुजारी थे।बाद में प्रतापगढ़ रियासत ने तीर्थ राज शुक्ल वैद्य के पिताजी को राजगुरु बनाया। देवली रियासत के युवराज को बाबू साहब तेजगढ़ की रानी साहब ने गोद ले लिया। लाल बटुक बहादुर सिंह तेजगढ़ में रहने लगे। आपके दो पुत्र लाल जय सिंह एवं लाल छोटे सिंह थे। राजा साहब के छोटे भाई बाबू साहब कहलाए जिन्होंने अपनी कोठी सड़वा सोमवंशियान में बनाया जिनकी वंशावली में बाबू संत वक्श सिंह हुए और उन्हीं के सुपौत्र डॉक्टर राकेश सिंह हैं जो शिक्षा के क्षेत्र में जनपद में अलख जगा रहे हैं। आपकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रेमलता सिंह इस ब्लॉक लक्ष्मणपुर की ब्लाक प्रमुख हैं जो दयालुता करुणा और सरलता की प्रतिमूर्ति हैं। 1962 में सर्वप्रथम यहां पर श्रीमद्भागवत कथा लीलापुर के पंडित काशी प्रसाद ओझा ने श्रवण कराया था दास उस समय 8 वर्ष का था। वह यादें आज ताजा हो रही हैं। राम कथा मनुष्य के जीवन में दया करुणा एवं नम्रता का प्रभाव डालती है। हमें भगवान श्री राम का चरित्र यह ज्ञान प्रदान करता है कि पुत्र को माता पिता के प्रति गुरु के प्रति तथा भाई को भाई के प्रति स्त्री को पति के प्रति मित्र को मित्र के प्रति क्या करना चाहिए तथा विप्र गौ और संतों का सदैव हमें सम्मान करना चाहिए। 18 पुराणों में 7 करोड़ महामंत्र लिखे हैं परंतु सब का सार दो अक्षर राम नाम ही परात्पर परम मंत्र है। अतः यदि जीव अपना और आत्मा का कल्याण चाहते हैं तो राम भजे हित होइ सबही का नर तन जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर इसे स्मरण करते हुए धन्य हो सकता है। व्यास पीठ से तथा डॉक्टर राकेश सिंह एवं ब्लॉक प्रमुख प्रेमलता सिंह द्वारा धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास एवं नारायणी रामानुज दासी को अंगवस्त्रम एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कमलेश सिंह प्रतिनिधि जिला पंचायत सदस्य रामनरेश पांडे रामकृष्ण रामानुज दास पंडित राकेश पांडे आचार्य धर्मेंद्र पांडे रमाशंकर सिंह मुन्नू प्रशांत सिंह रमाशंकर पांडे रमाकांत पांडे जे पी पांडे मास्टर साहब अयोध्या प्रसाद पांडे भगवती प्रसाद रजक पूर्व पेशकार बड़काऊ पाल चंदू शुक्ला सहित भारी संख्या में महिला पुरुष एकत्रित रहकर कथा को श्रवण किए। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
