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नवरात्र के महीनो में माता अन्नपूर्णा मंदिर में लोगों की अपार भीड़
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    19 Mar 2026 16:08 PM



फास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कन्नौज। नवरात्र में मंदिरों पर लोगों की अपार भीड़ प्रारंभ, सुख और समृद्धि की देवी मां अन्नपूर्णा का मंदिर कन्नौज में प्रसिद्ध और प्राचीन है। कन्नौज जिले से करीब 14 किलोमीटर दूर तिर्वा तहसील में ठठिया चौराहा पर यह मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि माता को अन्न की देवी के रूप में अन्न ही समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि मंदिर प्रांगण की मिट्टी को अपनी रसोई में व खेतों में रखने से घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती और खेतों में फसल भरपूर होती है। कन्नौज जिले के तिर्वा क्षेत्र में माता अन्नपूर्णा का अति प्राचीन मंदिर बना हुआ है। यहां के मंदिर प्रांगण से जो भी व्यक्ति मिट्टी ले जाता है, उसे अपने खेतों और रसोई घर में रखता है तो उसके रसोई घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती तथा खेतों में होने वाली फसल की पैदावार दुगनी हो जाती है। इस मंदिर में छोटे-छोटे पत्थर के हाथी की मूर्ति बनी हुई है जिनकी गिनती आज तक कोई भी नहीं कर सका है। हर साल आषाढ़ी पूर्णिमा को यहां पर भव्य मेले का आयोजन होता है। देश के कोने कोने से श्रद्धालु माता अन्नपूर्णा के दर्शन करने आते हैं और मंदिर परिसर की मिट्टी प्रसाद स्वरूप अपने घर ले जाते हैं। मंदिर के द्वार के निकट दक्षिण दिशा में स्थित प्रतिमा मां अन्नपूर्णा जी की है। मंदिर में भगवती त्रिपुर सुंदरी लक्ष्मी जी की प्रतिमा श्रीयंत्र के केंद्र बिदु पर स्थापित है। इसको हाथियों से अभिमंत्रित करके बांधा गया। मंदिर के नीचे तीन दिशाओं में हाथियों की श्रृंखला बनी हुई है। मंदिर में जो कलाकृति है उसको देखकर ही इसकी प्राचीनता का अनुमान लगाया जा सकता है।

मंदिर के बाहरी हिस्से में छोटे छोटे पत्थर के बने हाथियों की श्रंखला बनी हुई है। श्रद्धालुओं का मामना है कि ये मंदिर की सुरक्षा में लगे है। इन हाथियों एक और अद्भुत चीज है इन सभी हाथियों की कोई भी व्यक्ति कभी भी सही से गिनती नही सका, जितनी बार इनकी गिनती करते हैं गिनती हमेशा आगे-पीछे हो जाती है।प्रत्येक वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमे पूरे देश से यहां श्रद्धालु माता के दर्शन को आते है। मां अन्नपूर्णा मंदिर की अविस्मरणीय कारीगरी जिनमें हाथियो के निर्माण से लेकर मंदिर के आधार की शिल्पकला तक है, देखकर यहां आने वाले भक्त मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। माता के मंदिर से भक्त पंच मंदिरों के दर्शन के लिये जाते हैं।यह मंदिर 16वीं शताब्दी में राजा प्रीतम सिंह ने बनवाया था। उस समय केवल राज परिवार ही इसमें पूजा-पाठ किया करता था। तिर्वा के राजा प्रीतम सिंह अन्नपूर्णा देवी के दर्शन करने प्रतिवर्ष नवरात्र में काशी नगरी बनारस जाया करते थे। यह उनका नियम था। उनकी आस्था से प्रसन्न होकर देवी मां ने स्वप्न दिया। राजा प्रीतम सिंह को एक देवी स्वरूप कन्या ने सपने में दर्शन दिए और कहा कि इस जगह पर खुदाई करने पर उन्हें कुछ प्राप्त होगा। राजा प्रीतम सिंह ने यहां खुदाई कराई और उनको यहां पर एक देवी की प्रतिमा मिली जिसके बाद राजा प्रीतम सिंह ने यहां पर मंदिर का निर्माण कराया था। राजा ने इस मंदिर का नाम सिद्ध पीठ माता अन्नपूर्णा मंदिर रखा। उस समय केवल राज परिवार को यहाँ पूजा करने की अनुमति थी, धीरे धीरे समय बीतने के साथ सभी को माता के दर्शन की अनुमति हो गई। रिपोर्ट: प्रियंका शुक्ला 151188565 



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