जिला कारागार बायोमेडिकल वेस्ट सिस्टम लगाने वाली बनी प्रदेश की पहली जेल
फास्ट न्यूज इंडिया यूपी प्रतापगढ़। जिला कारागार प्रतापगढ़ ने सुधार, स्वच्छता और आधुनिक सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 3 आईएसओ प्रमाणपत्र प्राप्त किए हैं। यह प्रमाणपत्र दिल्ली की क्वालिटी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए व्यापक मूल्यांकन के बाद प्रदान किए गए। जेल अधीक्षक ऋषभ द्विवेदी ने बताया कि कारागार में स्वच्छता, हरित वातावरण और बंदियों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया है। परिसर में 263 पुराने वृक्षों के संरक्षण के साथ 300 नए पौधे लगाए गए हैं। साफ-सफाई के लिए हर बैरक और संभावित स्थानों पर डस्टबिन लगाए गए हैं तथा नगर पालिका के सहयोग से प्रतिदिन कूड़ा निष्पादन सुनिश्चित किया जाता है। जिला कारागार प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश की पहली जेल बन गई है जहां बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल सिस्टम स्थापित किया गया है। जेल अस्पताल में थर्ड पार्टी के माध्यम से सभी मेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जाता है, जिससे स्वच्छता बनी रहती है। बंदियों के पुनर्वास के लिए शिक्षा और कौशल विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। शिवनादर फाउंडेशन के सहयोग से निरक्षर बंदियों के लिए साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीकों जैसे प्रोजेक्टर और डिजिटल सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही कंप्यूटर प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होने बताया है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जेल परिसर में 87 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत हेल्थ एटीएम की स्थापना की गई है, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श संभव हो पा रहा है। बंदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, जिसमें एचआईवी जांच भी शामिल है, कराई जाती है। भोजन व्यवस्था को आधुनिक बनाते हुए ऑटोमैटिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है और जेल की बागवानी से ताजी सब्जियां उपलब्ध कराई जाती हैं। बेहतर गुणवत्ता के कारण कारागार को एफएसएसएआई द्वारा “ईट राइट कैंपस 4 स्टार” प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है। इसके अलावा जेल में आंवला से बने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें आंवलाकृति ब्रांड के तहत बाजार में बेचा जा रहा है। ये उत्पाद महाकुंभ प्रयागराज और स्थानीय आयोजनों में भी बिक्री के लिए भेजे गए। जेल प्रशासन सुधार और नवाचार के इन प्रयासों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा, ताकि कारागार को एक आदर्श सुधारगृह के रूप में स्थापित किया जा सके। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
