मध्य प्रदेश शिवपुरी जिले के करैरा न्यायालय से जमीन फर्जीवाड़े के एक मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती मोनिका आध्या ने आरोपी ओबेदुल्ला उर्फ बॉबी और दिर्गपाल सिंह बुंदेला को दोषी ठहराते हुए कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करैरा क्षेत्र के लोटनपुरा टीला रोड स्थित जमीन को लेकर यह मामला सामने आया था। परिवादी सफीउल्लाह खान निवासी मरोड़ीपुरा ने न्यायालय में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत जमीन से संबंधित फर्जी मुख्तियारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार कर जमीन हड़पने का प्रयास किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता हर्षवर्धन दुबे, अधिवक्ता विनोद धाकड़ और अधिवक्ता अतुल भार्गव ने प्रभावी पैरवी करते हुए दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी कर उन्हें असली बताकर उपयोग करने का प्रयास किया। इसके आधार पर न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी) और धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) के तहत दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने आरोपी ओबेदुल्ला उर्फ बॉबी को 7 वर्ष का कारावास और 3 हजार रुपये अर्थदंड, जबकि दिर्गपाल सिंह बुंदेला को 5 वर्ष का कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
बताया जाता है कि मुख्य आरोपी ओबेदुल्ला उर्फ बॉबी करैरा के फूटे तालाब क्षेत्र में अमन पैथोलॉजी लैब संचालित करता है और पहले भी विवादों में रहा है।
न्यायालय के इस फैसले को क्षेत्र में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। परिवादी सफीउल्लाह खान ने न्याय मिलने पर न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आखिरकार सत्य की जीत हुई है। देखे आकाश लोधी की रिपोट

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