बिलासपुर/गदरपुर । साका श्री ननकाना साहिब की याद और गुरुद्वारों की सेवा-संभाल के विषय को समर्पित एक महत्वपूर्ण पंथक सेमिनार का आयोजन बैंकट हॉल,मन्नत गार्डन बिलासपुर (जिला रामपुर,उत्तर प्रदेश) में किया गया,जिसमें सैकड़ों की संख्या में संगत ने भाग लिया। इस अवसर पर सिख पंथ के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों तथा गुरुद्वारों की सेवा-संभाल से जुड़े विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में पंथ के प्रमुख वक्ताओं ने संगत को संबोधित किया, जिनमें ज्ञानी केवल सिंह जी,राजविंदर सिंह राही, खुशहाल सिंह जी,प्रीतम सिंह संधू,हरदीप सिंह डिब्डिबा, फतेहजीत सिंह,सतवंत सिंह, निर्मल सिंह हंसपाल,केहर सिंह, अमनिंदर सिंह,कर्नल गुरदेव सिंह,सुरजीत सिंह,संतोख सिंह रंधावा,कश्मीरा सिंह,बलबीर सिंह बरखेड़ी,बलजीत सिंह गोलपार,गुरसेवक सिंह मौहार प्रमुख रूप से वक्ता रहे।प्रतपाल सिंघ ने मंच का संचालन किया। वक्ताओं ने साका ननकाना साहिब के शहीदों की महान कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि यह घटना सिख इतिहास में गुरुद्वारों की मर्यादा और सेवा-संभाल की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरणा का स्रोत है।इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नानकमत्ता साहिब के अध्यक्ष सरदार हरबंस सिंह चुग जी को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नानकमत्ता साहिब के अध्यक्ष के तौर पर और उनकी सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही साका ननकाना साहिब की अगुवाई करने वाले महान पंथक नेता सरदार करतार सिंह झब्बर के वंशज सरदार गुरचरण सिंह झब्बर को भी संगत की ओर से सम्मानित किया गया।सेमिनार के दौरान संगत द्वारा सर्वसम्मति से चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए—जिनमें तराई सिख महासभा सिखों के धार्मिक,सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मसलों का समाधान निकालने के लिए सिख बुद्धिजीवियों और सिख नौजवान भाई-बहनों को साथ लेकर अपनी संस्था का विस्तार करना,वर्तमान समय में तराई सिख महासभा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आठ जिलों में सिखों के सहयोग से कार्य कर रही है। इसलिए निर्णय लिया गया कि हर जिले में सिखों के मसलों पर विचार-विमर्श करने और उनके समाधान के लिए हर महीने के पहले रविवार को बैठक आयोजित किया जाना,साका ननकाना साहिब को याद करते हुए यह प्रस्ताव पारित किया गया कि तराई सिख महासभा इन आठ जिलों के लगभग 1500 गुरुद्वारों में अकाल तख्त साहिब से पंथ प्रमाणित सिख रहत मर्यादा को लागू करने का प्रयास करना,।
इलाके में सिख बहनों की एक अलग विंग तैयार की जाएगी। गांव-गांव में सिख बहनों तथा क्षेत्र के ग्रंथी सिंहों के सहयोग से गुरमत की कक्षाएं लगाई जाएंगी, ताकि नई पीढ़ी को गुरमत से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने संगत और सभी वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि पंथक जागरूकता और गुरु घरों की मर्यादा को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे।
सैकड़ों की गिनती में संगत मौजूद रही। सूक्ष्म अरदास के उपरांत सेमिनार का समापन किया गया।
