EPaper Join LogIn
एक बार क्लिक कर पोर्टल को Subscribe करें खबर पढ़े या अपलोड करें हर खबर पर इनकम पाये।

नारी का सम्मान एवं प्रसन्न रखने मात्र से मनुष्य संसार का प्रत्येक सुख समृद्धि को प्राप्त कर सकता है - देवेन्द्र जी महाराज काशी।
  • 151114592 - DEVENDRA CHATURVEDI 0 0
    08 Mar 2026 19:39 PM



काशी से प्रख्यात देवेन्द्र चतुर्वेदी जी महाराज ने नारी शक्ति सम्मान दिवस पर कहा नारी का सम्मान एवं प्रसन्न रखने मात्र से मनुष्य संसार का प्रत्येक सुख समृद्धि को प्राप्त कर सकता है आप शायद यकीन न करें लेक‌िन सच यह है क‌ि हर स्‍त्री के चार पत‌ि होते हैं और आपका नंबर चौथा होता है। यह बात आप इसल‌िए नहीं जान पाते हैं क्योंक‌ि व‌िवाह के समय जब पंड‌ित आपको व‌िवाह का मंत्र पढ़ा रहा होता है तब आप मंत्र का मतलब नहीं समझते हैं।अगर आप मंत्रों को सही तरीके से जानेंगे तो आपको पता चल जाएगा क‌ि व‌िवाह के समय मंडप पर बैठे दुल्हे का नंबर चौथा होता है उससे पहले उसकी पत्‍नी का स्वाम‌ित्व तीन लोगों को सौंपा जाता है। दरअसल वैद‌‌िक परंपरा में न‌ियम है क‌ि स्‍त्री अपनी इच्छा से चार लोगों को पत‌ि बना सकती है। इस न‌ियम को बनाए रखते हुए स्‍त्री को पत‌िव्रत की मर्यादा में रखने के ल‌िए व‌िवाह के समय ही स्‍त्री का संकेत‌िक व‌िवाह तीन देवताओं से करा द‌िया जाता है। हर स्‍त्री के होते हैं चार पत‌ि, आपका नंबर चौथा, जान‌िए कैसे? सबसे पहले कन्या का अध‌िकार चन्द्रमा को सौंपा जाता है, इसके बाद व‌िश्वावसु नाम के गंधर्व को, इसके बाद अग्न‌ि को और अंत में उसके पत‌ि को। इस वैद‌िक परंपरा के कारण ही द्रौपदी एक से अध‌िक पत‌ियों के साथ रही। ‌फ‌िर भी कर्ण ने द्रौपदी को वेश्या कहकर अपमान क‌िया ज‌िसकी एक मात्र वजह थी।द्रौपदी ने उस समय की व्यवस्‍था से आगे बढ़कर पांच पुरुषों को अपना पत‌ि स्वीकारा था। अगर द्रौपदी चार पुरुषों की पत्नी होती तो उस समय के न‌ियमानुसार वह न्याय संगत और सामाज‌िक रूप से स्वीकृत होता और कर्ण उन्हें वेश्या नहीं कह सकता था। स्‍त्री के चार पत‌ि हो सकते हैं इस व्यवस्‍था की शुरुआत करने वाले या यूं कहें वैवाह‌िक व्यवस्‍था को स्‍थाप‌ित करने वाले उद्दालक ऋष‌ि के पुऋ श्वेतकेतु थे। महाभारत में एक स्‍थान पर ज‌िक्र आया है क‌ि कुन्ती कहती है क‌ि पहले स्‍त्री पर कोई पाबंदी नहीं थी वह अपनी मर्जी से कभी भी क‌िसी पुरुष के साथ जा सकती थी। यानी स्‍त्री पर क‌िसी प्रकार की कोई पाबंदी नही ‌थी। लेक‌िन धीरे-धीरे अध‌िकारवाद का जन्म होता गया और स्‍त्र‌‌‌ियों की स्वतंत्रता को कम क‌िया जाने लगा और इसमें श्वेतकेतु द्वारा स्‍थाप‌ित व‌िवाह व्यवस्‍था भी शाम‌िल है।श्वेतकेतु ने स्‍त्र‌ियों की स्वतंत्रता को कम करने का काम इसल‌िए क‌िया क्योंक‌ि एक बार उन्होंने अपनी माता को क‌िसी दूसरे पुरुष के साथ आल‌िंगन करते हुए देख ल‌िया। उस समय उनके मन में यह सवाल आया क‌ि वह अपने प‌िता के पुत्र हो भी सकते हैं क‌ि नहीं?इस प्रश्न से उनके मन में पुरुषों की संख्या सीम‌ित करने का व‌िचार आया और यह तय हुआ क‌ि स्‍त्री स‌िर्फ चार पुरुषों के साथ जा सकती है। इस व्यवस्‍था के पीछे यह भी मंशा थी क‌ि कबीले और समुदाय के हर पुरुष को स्‍त्री म‌िल सके। 



Subscriber

188585

No. of Visitors

FastMail

वाराणसी - दिल्ली में खराब मौसम का असर, सुरक्षा कारणों से दो उड़ानें वाराणसी डायवर्ट     वाराणसी - पांच हजार करोड़ से काशी बनेगा सिटी इकोनॉमिक रीजन, कैंट से बाबतपुर तक होगा रोपवे का विस्तार     वाराणसी - काशी विश्वनाथ धाम से मुखनिर्मालिका गौरी और मां विशालाक्षी शक्तिपीठ को भेजा गया उपहार     वाराणसी - काशी विश्वनाथ मंदिर की पहली गंगा आरती छह बजे होगी शुरू, 45 मिनट चलेगी; ललिता घाट पर निहारेंगे लोग     चंदौली - गुब्बारे में हवा भरने वाले गैस सिलिंडर में हुआ ब्लास्ट, दो घायल     चंदौली - निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का स्लैब गिरा, गुणवत्ता पर उठे सवाल, सपा सांसद का धरना