फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कासगंज। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के '100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान' के तहत जनपद कासगंज में बाल विवाह के विरुद्ध छिड़ी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान द्वारा संचालित 'बाल विवाह मुक्ति रथ' ने जिले के गांव-गांव और कस्बों में घूमकर कुप्रथा के खिलाफ जन-आंदोलन खड़ा कर दिया है।अपर जिलाधिकारी दिग्विजय सिंह द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया यह रथ 30 दिनों तक जिले की सड़कों पर दौड़ता रहा। इस अभियान के तहत की 2160 किलोमीटर की सघन यात्रा व 385 गांवों तक सीधा संपर्क एवं15 हजार आम नागरिकों को अभियान से जोड़ा गया। वहीं 9 हजार छात्र-छात्राओं और शिक्षण स्टाफ ने ली बाल विवाह रोकने की शपथ।संस्थान द्वारा इस अभियान को बेहद रणनीतिक तरीके से तीन चरणों में विभाजित किया ताकि समाज के हर वर्ग तक संदेश पहुंचे l युवाओं को जागरूक कर उन्हें इस कुप्रथा के खिलाफ प्रहरी बनाया गया। धर्मगुरुओं, कैटरर्स, बैंड-बाजा संचालकों और मैरिज हॉल मालिकों से संवाद कर उन्हें बाल विवाह में सेवाएं न देने हेतु संकल्पित किया गया। उन्हें आगाह किया गया कि बाल विवाह में सहयोग देना कानूनी अपराध है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से सीधे संवाद स्थापित कर जागरूकता फैलाई गई। मीना सिंह, ने कहा कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा मात्र नहीं है, बल्कि यह विवाह की आड़ में बच्चों के साथ होने वाला बलात्कार है। यह बच्चियों को कुपोषण और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है। अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय है। सुदूर इलाकों तक पहुंचने के लिए जहाँ रथ नहीं जा सका, वहां मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए 'बाल विवाह मुक्त कासगंज' का संदेश पहुंचाया गया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन के रूप में काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान अब इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने के बेहद करीब है।प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के सहयोग से यह सरकारी अभियान अब एक 'जन-अभियान' बन चुका है, जिससे आने वाले समय में जिले की मासूमों का भविष्य सुरक्षित होने की पूरी उम्मीद है। रिपोर्ट संजय सिंह 151110069
