हमले तथा उसके ज्ञात कारण के निराकरण की उठाई मांग 0राज्य की चिकित्सीय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रभावित कार्रवाई की मांग
फास्ट न्यूज इंडिया प्रतापगढ़। शहर के मशहूर रेडियोलॉजिस्ट डाक्टर शिव मूर्ति लाल मौर्य ने अपने ऊपर हुए प्राणघातक हमले के सिलसिले सूबे के मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने अपने ऊपर हुए हमले के ज्ञात कारणों के निराकरण और राज्य में चिकित्सीय व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रभावी कार्यवाई करने की मांग की है। जिससे कि प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रोगियों का दबाव कम हो और उन्हें समय से सेवाएं देते हुए सुरक्षित भी रहे। बता दें कि डाक्टर शिव मूर्ति लाल ने प्रताप बहादुर पार्क में निदान नाम से अल्ट्रासाउंड केंद्र खोला है। गत तीन जनवरी की शाम को स्कूटी से सेंटर से घर जाते समय रास्ते में कुछ अज्ञात लोगों ने लोहे की रॉड और हथौड़े से इन पर हमला कर दिया साथ में डाक्टर सचिन भी थे। हल्ला गुहार सुनकर आसपास के लोग दौड़े तब जानकर इनकी जान बची। इस हमले में गंभीर चोटें आई। जिसमें एक हाथ की अंगुली की हड्डी टूट गई। यह पूरी घटना वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरे कैमरे में कैद हो गई। चिकित्सक पर हुए मामले को एसपी दीपक भूकर ने गंभीरता से लिया। तहरीर पर अज्ञात हमलवारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ। तेजी दिखाते हुए पुलिस ने दूसरे दिन एक हमलावर कफील उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया। दावा है कि उसके बाद दो और आरोपी गिरफ्तार हुए। जिन्हें जेल भेज दिया गया। कोर्ट ने इनकी जमानत रद्द कर दी है। सूत्रों का कहना है कि आरोपियों ने हाई कोर्ट की शरण ली है। इधर, हमले के बाद कई संगठनों ने एसपी से मुलाकात की। एसपी ने उन्हें समुचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। यह मामला मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा। इस बीच पीड़ित चिकित्सक शिव मूर्ति लाल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन पर हमले की वजह उनके अल्ट्रासाउंड केंद्र पर मरीज का नंबर न लग पाना है। पत्र में आगे लिखा है कि मरीज की जांच करने और रिपोर्ट तैयार करने में काफी समय लगता है। एक दिन में सीमित संख्या में ही मरीजों की जांच संभव है। उस दिन आने वाले मरीज की जांच अगले दिन ही संभव हो पाती है। लेकिन मरीज उसी दिन की जांच करने का दबाव बनाते हैं। ऐसा न होने पर विवाद, मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। उन पर हमला इसी की वजह है। उन्होंने कहा कि उनके पास राजा प्रताप बहादुर अस्पताल के अलावा प्राइवेट मरीज भी होते हैं। जिससे काम का अधिक दबाव रहता है। उनका दावा है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठीक से संचालित नहीं हो पा रहा है। इसके लिए मरीजों को पंद्रह से बीस दिन का समय दिया जाता हैं। यहां पर मरीज कुछ नहीं कहता क्योंकि सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी स्थापित है। जबकि प्राइवेट जांच केंद्रों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। जिससे मरीज विवाद और गाली गलौज करते हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि राज्य के सभी नागरिकों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना राज्य और केंद्र सरकार का दायित्व है। प्राइवेट चिकित्सक तो केवल सहायक की भूमिका में हैं। रिपोर्ट विशाल रावत 151019049
