फ़ास्ट न्यूज इण्डिया यूपी बुलंदशहर। जहांगीराबाद रमजान के पाक महीने में मुस्लिम शिक्षिकाएं इबादत और जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चल रही हैं। रोजा रखने के बावजूद वे समय से विद्यालय पहुंचकर बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। सुबह सहरी से दिन की शुरुआत, फिर स्कूल में शिक्षण कार्य और घर लौटकर इफ्तार की तैयारी—इन सबके बीच वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रही हैं।
शिक्षिकाओं का कहना है कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और सेवा की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। वे विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों का भी पाठ पढ़ा रही हैं। रमजान के दौरान बदली दिनचर्या के बावजूद शिक्षा कार्य प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
मेहरून निशा, अध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय जलीलपुर ने कहा रमजान रहमत और बरकत का महीना है। रोजा इंसान को सब्र और परहेजगारी की सीख देता है। विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का संदेश देना भी जरूरी है।
बेगम आसिया जहरा, प्राथमिक विद्यालय कुदेना जयराम ने कहा सच्ची नियत से हर काम आसान हो जाता है। रोजा रखकर शिक्षण कार्य करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन समय प्रबंधन से जिम्मेदारियां बखूबी निभाई जा सकती हैं।
नसरीन, कंपोजिट स्कूल जीवनपुरा ने कहा की रमजान में जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। शिक्षा के साथ बच्चों में अनुशासन और संस्कार विकसित करना शिक्षक का दायित्व है, जिसे पूरी लगन से निभा रही हूं।
अज़रा सैफी, कंपोजिट स्कूल रसूलपुर ने कहा की रोजा धैर्य और संयम की सीख देता है। इबादत के साथ कर्तव्य पालन भी उतना ही जरूरी है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। रिपोर्ट - सुनील कुमार 151044750
