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राजघराने से सादगी तक: भाग्यश्री की अनकही कहानी
  • 151168597 - RAJESH SHIVHARE 0 0
    24 Feb 2026 12:29 PM



विशेष मैगजीन स्टोरी | जन्मदिन विशेष
✍️ राजेश शिवहरे, ब्यूरो चीफ (मैगजीन)
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भारतीय सिनेमा में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो कम काम के बावजूद अमिट छाप छोड़ जाते हैं। भाग्यश्री उन्हीं में से एक हैं। 23 फरवरी 1969 को जन्मी भाग्यश्री सिर्फ़ एक सफल अभिनेत्री नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कार और आत्मसम्मान की मिसाल भी हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से साझा किए, जो आज भी उतने ही रोचक और प्रेरक हैं।


👑 “मेरे पिता सांगली के राजा थे”

भाग्यश्री के पिता विजयसिंह पटवर्धन सांगली के राजा थे। हालांकि परिवार मुंबई में रहता था, लेकिन हर तीन साल में सांगली जाना होता था—जहां राजपरिवार का प्रोटोकॉल निभाया जाता। उम्र में बड़े लोग उनके पैर छूते, जो उन्हें असहज करता था।
जहां आम बच्चों के पास पालतू कुत्ते-बिल्लियाँ होती हैं, वहीं भाग्यश्री के पास अपना हाथी हुआ करता था। सांगली का गणपति उत्सव, उनका निजी मंदिर और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी—यह सब उनके बचपन का हिस्सा रहा।


📚 पढ़ाई, संस्कार और पिता की सीख

उनके पिता पढ़ने के शौकीन थे—लॉ, इंजीनियरिंग, बिज़नेस—कई डिग्रियों से सजे उनके विज़िटिंग कार्ड को देखकर भाग्यश्री को खुद पर शर्म आती थी कि वे मुश्किल से बी-कॉम कर पाईं। पिता की फैक्ट्रियाँ अफ्रीका और मॉरिशस तक फैली थीं।
मां रोहिणी गृहिणी थीं, जिन्होंने तीन बेटियों—भाग्यश्री, मधुवंती और पूर्णिमा—की परवरिश की। छोटी बहनें फिल्मों में नहीं आईं और विदेश (शिकागो व कनाडा) में सेटल हो गईं।


📺 अभिनय की शुरुआत: एक संयोग

टीवी सीरियल कच्ची धूप से शुरुआत एक संयोग थी। पड़ोसी अमोल पालेकर ने पहले छोटी बहन को रोल ऑफर किया। शूट से ठीक पहले बड़ी बहन का किरदार खाली हुआ और भाग्यश्री को मौका मिला।
डायलॉग याद न होने का डर था, मंच पर कभी गई नहीं थीं—फिर भी अमोल पालेकर की बात मान ली। एक महीने में शूटिंग पूरी हुई और शो ने उन्हें पहचान दिला दी। अमेरिका के वॉशिंगटन म्यूज़ियम में मिला पहला ऑटोग्राफ—यहीं से किस्सा बदल गया।


🎬 ‘मैंने प्यार किया’: किस्मत की दस्तक

फिल्मों में जाने का कोई प्लान नहीं था। लेकिन सूरज बड़जात्या ने उन्हें कच्ची धूप में देखा और अपनी फिल्म की कहानी सुनाई। कहानी सुनते-सुनते उनकी आँखें भर आईं।
शर्तें थीं—कुछ सीन्स नहीं करेंगी, कॉलेज छोड़े बिना शूट होगा। सूरज बड़जात्या ने स्क्रिप्ट में बदलाव किए। कई बार मना किया गया, बहाने बने—लेकिन किस्मत ने रास्ता बना ही लिया।


👗 परंपरा बनाम पर्दा

परिवार कंज़र्वेटिव था। कॉलेज में जींस-स्कर्ट की मनाही थी; सलवार-सूट ही पहनती थीं। मैंने प्यार किया के गीत “तुम लड़की हो” में पहनी स्कर्ट की जानकारी पिता को नहीं दी। ट्रेलर स्क्रीनिंग में पिता की नज़रें देखकर दिल बैठ गया—पर फिल्म ने इतिहास रच दिया।


⏰ संघर्ष भरी दिनचर्या

सुबह 7 बजे कॉलेज, दोपहर में वापसी, शाम 4 बजे मड आइलैंड के लिए निकलना, रात भर शूट और फिर सीधे कॉलेज—यह सिलसिला 18 साल की उम्र में शुरू हुआ। पोस्ट-प्रोडक्शन में 9 महीने लगे; रिलीज़ तक वे 20 की हो चुकी थीं।
सेट पर समर्पण की मिसाल खुद सूरज बड़जात्या थे—सबसे पहले आते, सबसे आख़िर में जाते। सह-कलाकार सलमान खान के साथ सेट का माहौल यादगार रहा।


🌸 विरासत

मैंने प्यार किया के बाद भाग्यश्री ने चुनिंदा काम किया—पर उनकी सादगी, मर्यादा और आत्मसम्मान ने उन्हें अलग पहचान दी। राजघराने में जन्म लेकर भी सामान्य जीवन जीना, अवसर मिलने पर शर्तों के साथ आगे बढ़ना—यही भाग्यश्री की असली पहचान है।

निष्कर्ष:
भाग्यश्री की कहानी बताती है कि सफलता सिर्फ़ शोहरत से नहीं, अपने मूल्यों पर टिके रहने से मिलती है। जन्मदिन पर उन्हें सलाम—एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने कम बोलकर ज़्यादा कह दिया।



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