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मुठभेड़, इनाम और सवाल: मथुरा में अपराध का ग्राफ आखिर क्यों नहीं थम रहा?
  • 151170853 - NAND KISHOR SHARMA 54 66
    21 Feb 2026 16:05 PM



मथुरा के फरह थाना क्षेत्र में स्वाट टीम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 25 हजार रुपये के इनामी लूट अभियुक्त रामजीत को मुठभेड़ के दौरान घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से तमंचा, कारतूस, लूट की रकम और वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद होने का दावा किया गया है। कागज़ों में यह एक और “सफल” पुलिस ऑपरेशन है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कई असहज सवाल खड़े कर रही है।

 

घटना फरह-परखम रोड स्थित गोवर्धन पुलिया के पास की बताई गई है, जहां चेकिंग के दौरान पुलिस और बदमाश के बीच आमना-सामना हुआ। पुलिस का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में बदमाश घायल हुआ और गिरफ्तार कर लिया गया। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।

 लेकिन असली सवाल मुठभेड़ से आगे शुरू होता है।

  आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों?

 जिस जिले में पुलिस की गश्त, चेकिंग और स्वाट टीम की सक्रियता के दावे रोज़ होते हों, वहीं लूट के आरोपी पर इनाम घोषित करना पड़े — यह अपने आप में व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है।

क्या अपराधी पुलिस की रणनीति से एक कदम आगे चल रहे हैं, या फिर कार्रवाई का पहिया घटना के बाद ही घूमता है?

  मुठभेड़ ही क्यों बन रहा समाधान?

 हर बड़ी वारदात के बाद एक स्क्रिप्ट तय दिखती है —

इनाम घोषित… मुखबिर सक्रिय… चेकिंग… मुठभेड़… बरामदगी… गिरफ्तारी…

सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों हुई, सवाल यह है कि वारदात होने तक सिस्टम सोया क्यों रहा?

 जनता के मन में उठते सीधे सवाल

 लूट की घटनाएं पहले कैसे हो जाती हैं?

 इनामी घोषित होने तक आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर क्यों रहता है?

 क्या खुफिया तंत्र केवल कागज़ों में ही सक्रिय है?

 और सबसे बड़ा सवाल — क्या अपराध रोकना प्राथमिकता है या मुठभेड़ के बाद प्रेस नोट जारी करना?

 आंकड़ों की सफलता बनाम सुरक्षा की हकीकत

 बरामद 24 हजार रुपये, तमंचा और बाइक पुलिस की उपलब्धि हो सकती है, लेकिन आम नागरिक के लिए असली उपलब्धि वह दिन होगा जब लूट की घटना ही न हो।

इनामी बदमाश का घायल होकर पकड़ा जाना खबर है, मगर अपराध का लगातार होना चिंता का विषय है।

 जवाब किसके पास?

 पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाना व्यवस्था पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि उसी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत का संकेत है।

मथुरा की सड़कों पर घूम रही खामोश बेचैनी पूछ रही है —

क्या सुरक्षा केवल मुठभेड़ों के बाद मिलने वाली राहत का नाम है, या फिर अपराध होने से पहले उसे रोकने की कोई ठोस रणनीति भी है?

 फिलहाल एक बदमाश घायल होकर पकड़ा गया है, लेकिन असली सवाल अब भी खुला है — मथुरा में अपराधियों के हौसले आखिर टूटेंगे कब?

रिपोर्ट नन्द किशोर शर्मा 151170853



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