मथुरा। आपको बता दें कि दिनांक 11 फरवरी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भारत माता ने अपने चरणों में जगह दी और वैकुंठ धाम को चले गए और ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज के साथ समस्त संतों, किन्नरों, नर, नारियों और युवा पीढ़ी की तरह से भव श्रद्धांजलि अर्पित की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक महान भारतीय राजनेता, विचारक और संगठनकर्ता थे। उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। उनके पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय एक रेलवे कर्मचारी थे और माता रामप्यारी एक धार्मिक महिला थीं ।
बचपन और शिक्षा
दीनदयाल जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गंगापुर में प्राप्त की और बाद में सीकर में पढ़ाई की। उन्होंने 1937 में पिलानी से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर कानपुर के सनातन धर्म कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने 1939 में बीए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की ।
राजनीतिक जीवन
दीनदयाल जी ने 1937 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए और जल्द ही इसके एक प्रमुख नेता बन गए। उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की और इसके महासचिव बने। 1967 में वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने ।
योगदान
दीनदयाल जी ने भारतीय राजनीति में एकात्म मानववाद की विचारधारा को बढ़ावा दिया। उन्होंने समाज में समरसता और आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल दिया। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'एकात्म मानववाद', 'दो योजनाएँ', 'सम्राट चंद्रगुप्त' और 'जगद्गुरु शंकराचार्य' हैं ।
दीनदयाल जी का निधन 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय में हुआ था। उनकी जयंती 25 सितंबर को मनाई जाती है और उन्हें भारतीय राजनीति में एक महान नेता के रूप में याद किया जाता है।
रिपोर्ट नन्द किशोर शर्मा 151170853
