मरदह गाज़ीपुर। मरदह ब्लॉक क्षेत्र के रायपुर बाघपुर गांव में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'ग्राम सचिवालय' योजना निष्प्रभावी साबित हो रही है। लाखों रुपये की लागत से निर्मित यह सचिवालय भवन अब पशुओं को बांधने का अड्डा बन गया है, जिससे ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि सचिवालय का निर्माण होने के बावजूद इसके ताले कभी नहीं खुलते और न ही यहां कोई कर्मचारी बैठता है। भवन के अनुपयोगी होने के कारण अब इसका उपयोग पशुओं को रखने के लिए किया जा रहा है। अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए ग्रामीणों ने मंगलवार को सचिवालय परिसर में पशु बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।स्थानीय ग्रामीण और युवा नेता विवेक स्वाधीन के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि सचिवालय होने के बावजूद उन्हें आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र जैसे छोटे कार्यों और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए कई किलोमीटर दूर ब्लॉक या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि 'डिजिटल इंडिया' के दौर में भी गांव का अपना सचिवालय बंद पड़ा है, जिससे सरकार की योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। भवन का रखरखाव न होने से सरकारी संपत्ति जर्जर हो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम सचिवालयों को 'मिनी ब्लॉक' के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया था, ताकि पंचायत सहायक और सचिव जनता की समस्याओं का निस्तारण कर सकें।विवेक स्वाधीन ने कहा, "जब हमारे गांव में सचिवालय बना है, तो हमें बाहर क्यों भटकना पड़ रहा है? यह भवन केवल दिखावे के लिए है, काम के लिए नहीं।" ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है। रिपोर्ट -आर्यन सिंह 151176333
