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स्वर्गीय जे 0पी0 मिश्रा के 71 वा जयंती एवं द्वितीय पूर्ण तिथि को पितृ पर्व के रूप में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया
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    04 Feb 2026 22:37 PM



घोसी मऊ

घोसी स्थित जेपी उद्यान में श्रद्धा व गरिमा के साथ मनाया गया पितृ पर्व

घोसी स्थित जेपी उद्यान में स्वर्गीय जेपी मिश्रा की जयंती एवं द्वितीय पुण्यतिथि को पितृ पर्व के रूप में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु श्री राम दिनेशाचार्य जी (हरि नाम पीठ, अयोध्या धाम) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोज कांत जी शाह, प्रचारक प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (अतीत) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत श्रवण कुमार सम्मान भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर जगद्गुरु श्री राम दिनेशाचार्य जी ने पृथ्वी, सत्ता और पुत्र धर्म के महत्व पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि “पिता की आत्मा ही पुत्र के रूप में जन्म लेती है, इस सत्य को आज के समाज में समझाना अत्यंत आवश्यक है।”

उन्होंने वर्तमान समय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग पिता की संपत्ति और वसीयत तो लेना चाहते हैं, लेकिन उनके संस्कार, अनुशासन और विरासत को अपनाने से कतराते हैं। माता-पिता का सम्मान केवल संपत्ति के लिए नहीं, बल्कि उनके त्याग, तपस्या और मूल्यों के लिए होना चाहिए।

रामचरित मानस के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने माता कैकई और श्रीराम के संवाद, वनवास और राजसत्ता के अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि पिता के वचन का पालन करना पुत्र के लिए सौभाग्य होता है। श्रीराम ने वनवास को दंड नहीं बल्कि सौभाग्य माना और अपने पिता महाराज दशरथ के वचन की मर्यादा रखी।

उन्होंने कहा कि आज संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, परिवारों में एकता का अभाव होता जा रहा है। समयाभाव और स्वार्थ के कारण परिवार विखंडित हो रहे हैं, जिससे संस्कार कमजोर हो रहे हैं। यदि परिवार में एक-दूसरे की चिंता और देखभाल न हो, तो परिवार टूटना निश्चित है।

जगद्गुरु जी ने कहा कि धर्म की सच्ची परिभाषा यह है कि हमारे किसी कार्य से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाए। और यदि हमारे कारण किसी की आंखों में आंसू आ जाएं, तो वह सबसे बड़ा अधर्म है।

उन्होंने श्रीराम को आदर्श पुरुष बताते हुए कहा कि यदि श्रीराम केवल अयोध्या के सिंहासन पर बैठे रहते, तो वे इतने पूजनीय न होते। उन्होंने सिंहासन छोड़कर वंचितों, गरीबों और पीड़ितों के बीच जाकर उनके आंसू पोंछे, इसलिए वे युगों-युगों तक स्मरणीय बने।

कार्यक्रम का समापन सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्यों और सेवा भावना के संदेश के साथ हुआ।

 देखे मऊ से कोमल प्रसाद की रिपोट  151172378

 

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