संतों का प्रयोगशाला उनका अंतर्जगत है :- महात्मा सुजाता बाई जी
वाराणसी । धर्म नगरी वाराणसी के धुपचंडी स्थित स्वयंबर लॉन में दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह के दूसरे दिन भक्तों को समझाते हुए बिहार प्रांत प्रभारी महात्मा हीरा बाई जी ने कहा कि 'महाजनो येन गत: स पंथा' अर्थात महापुरुषों के बताएं गए मार्ग ही हमारे लिए कल्याणकारी है, उनके द्वारा बताएं मार्ग पर चलकर ही हम अपना लोक और परलोक सुधार सकते है।
अखिल भारतीय आध्यात्मिक और सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के प्रणेता विश्व प्रसिद्ध समाजसेवी व आध्यात्मिक गुरु पूज्य श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से समिति के बिहार प्रांत प्रभारी महात्मा हीरा बाई जी ने बताया कि धार्मिक और आध्यात्मिक होना दोनों अलग विषय है। ज़ब हम यज्ञ-हवन, दान-पुण्य, तीरथ, व्रत-उपवास, भूखे को भोजन देना, प्यासे को पानी देना यह सब धार्मिकता के अंतर्गत आता है। लेकिन ज़ब ज्ञानी संतों के सानिध्य से अध्यात्म ज्ञान को प्राप्त करते है, तब हम आध्यात्मिक कहलाते है।
कार्यक्रम में जिला वाराणसी प्रभारी महात्मा सुजाता बाई जी ने सत्संग की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि हमारे बैज्ञानिक ज़ब कोई खोज करते है तो वह प्रयोगशाला में जाते है लेकिन ज्ञानी संत ज़ब रिसर्च करते है तो वह अंतर्जगत की तरफ जाते है। क्योंकि उनका ह्रदय ही प्रयोगशाला होता है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. दयाशंकर मिश्रा 'दयालु गुरु जी'(आयुष मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) का फूल-माला और पटके पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। अपने उद्बोधन में माननीय दयालु गुरु जी ने कहा कि आज संतों के दर्शन और सत्संग पाकर अभिभूत हूँ। समिति के सभी संतों और कार्यकर्ताओं का स्वागत और आमंत्रण के लिए आभार जताया। मंच पर उपस्थित महात्मा हीरा बाई जी ने माननीय मंत्री जी को समिति का साहित्य और प्रसाद देकर उनको धन्यवाद दिया। उपस्थित सभी संतों और गणमान्य अतिथियों का समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। दिल्ली सहित अनेक स्थानों से आए भजन गायक कलाकारों ने अपने भक्तिपूर्ण प्रेरणादायक व सुमधुर भजनों द्वारा सभी भक्तों को लाभान्वित किया । यह थी वाराणसी से रविन्द्र गुप्ता की रिपोट
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