प्रयागराज। यह कहानी कौशांबी में जन्मे दो सिर वाले बच्चे की है। बता दें दुख से उम्मीद और फिर जीवन की जीत की है। डॉ राजीव सिंह नारायण स्वरूप हास्पिटल मुंडेरा प्रयागराज की। जहां चार बेटियो के बाद जन्म लिया बेटा लेकिन पल भर में खुशियां मातम में बदल जाती है। लेकिन भगवान के दूसरा अवतार कहे जाने वाले डॉ राजीव सिंह ने मातम को खुशियों में बदला और अब वह बच्चा पूरी तरस स्वस्थ हैं। डॉ राजीव सिंह की पूरी टीम मिलकर बच्चे का किया सफल आपरेशन। जिस बच्चे को देखकर घर में मातम छा गया था, आज वही बच्चा स्वस्थ जीवन की मिसाल बन गया है।”
चार बेटियों के बाद जन्मे इस बच्चे को जन्म से ही दो सिर (एन्सेफालोसील) की गंभीर बीमारी थी।
लोगों ने कहा – यह नहीं बचेगा…
कई जगह भटके, निराशा ही हाथ लगी।
लेकिन नारायण स्वरूप हॉस्पिटल में उम्मीद को नया जीवन मिला।
सफल ऑपरेशन। आज 1 साल बाद बच्चा पूरी तरह सुरक्षित, ग्रोथ बिल्कुल सामान्य,यह कहानी है – चिकित्सा, विश्वास और हिम्मत की जीत “जहाँ उम्मीद खत्म हुई, वहीं से इलाज शुरू हुआ। जन्मजात बीमारी नहीं, सही इलाज ज़रूरी है।. निराशा से नई ज़िंदगी तक। हर बच्चा जीने का हकदार है। चमत्कार नहीं, यह आधुनिक चिकित्सा की ताक़त है।जिस बच्चे को सबने छोड़ दिया, उसे नारायण स्वरूप हॉस्पिटल ने जीवन दिया डॉ राजीव सिंह नारायण स्वरूप हास्पिटल प्रयागराज। रिपोट - मनोज सिंह 151008265
