खड़गपुर : भारत सरकार द्वारा स्थापित आईआईटी श्रृंखला का प्रथम संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर, वर्ष 1951 में ऐतिहासिक हिजली डिटेंशन कैंप में स्थापित हुआ था। बीते 75 वर्षों में यह संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर उभरा है। 2,100 एकड़ में फैला इसका विशाल परिसर इसे देश का सबसे बड़ा एवं सर्वाधिक विविधतापूर्ण तकनीकी संस्थान बनाता है। प्लैटिनम जुबली वर्ष में प्रवेश करते हुए, आईआईटी खड़गपुर अपने 75 वर्षों की शैक्षणिक उत्कृष्टता, वैश्विक सहभागिता, विविधता और राष्ट्र-निर्माण की समृद्ध विरासत का उत्सव मना रहा है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत के अग्रणी संस्थान के रूप में, आईआईटी खड़गपुर ने सदैव संस्कृतियों के बीच ज्ञान-विनिमय और वैश्विक संवाद को प्रोत्साहित किया है। इसी परंपरा के अनुरूप, “सभी के लिए संगीत एवं शांति के लिए संगीत” के संदेश के साथ आयोजित अंतरराष्ट्रीय लोक संगीत महोत्सव ‘सुर जहान’ संस्थान के मूल्यों से पूर्णतः सामंजस्य रखता है। आईआईटी खड़गपुर को यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि वह 30 जनवरी से 01 फरवरी 2026 तक अपने परिसर में सुर जहान का आयोजन करेगा।
इस अवसर पर आयोजित संध्याकालीन संगीत समारोहों में चार प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंड अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे:
• सौसेयास (Saucējas) — लातविया • विगुएला (Vigüela) — स्पेन • रेडिएंट आर्केडिया (Radiant Arcadia) — डेनमार्क • फोल्कर बैंड (Folker Band) — हंगरी
ये सभी बैंड पारंपरिक संगीत शैलियों को समकालीन अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं। भारत की समृद्ध संगीत परंपरा का प्रतिनिधित्व गुजरात के सिद्दी गोमा तथा बंगाल के बाउल कलाकार करेंगे, जिनकी प्रस्तुतियाँ दर्शकों को विविध लयों, दर्शन और जीवंत सांस्कृतिक अनुभवों की यात्रा पर ले जाएंगी। संध्याकालीन कार्यक्रमों के अतिरिक्त, महोत्सव के दौरान दिवसीय कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा, जिनका उद्देश्य विभिन्न लोक संगीत परंपराओं, वाद्ययंत्रों और शैलियों की गहन समझ विकसित करना तथा कलाकारों और दर्शकों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र की डुरुआ जनजाति के लोक संगीत एवं नृत्य तथा पश्चिम बंगाल की संथाल जनजाति की पारंपरिक कठपुतली कला ‘चादर बादर’ पर आधारित विशेष पॉप-अप प्रस्तुतियाँ भी होंगी। आयोजन समिति आईआईटी खड़गपुर परिवार—परिसर निवासियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों—से इस विशिष्ट एवं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव का साक्षी बनने के लिए सादर आमंत्रण देती है। सुर जहान न केवल संगीत का, बल्कि सांस्कृतिक एकता, विविधता और वैश्विक सौहार्द का उत्सव होगा, जो आईआईटी खड़गपुर के प्लैटिनम जुबली वर्ष की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है।
जिला प्रभारी अजय चौधरी की रिपोर्ट।


