फास्ट न्यूज इंडिया पीलीभीत
#जियाउल हक खान डिस्ट्रिक्ट इंचार्ज फास्ट न्यूज इंडिया चैनल पीलीभीत
प्रशासन की लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; सुरक्षा इंतजाम न होने से उजड़ गए तीन घरों के चिराग।
पीलीभीत। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर जहाँ लोग आस्था की डुबकी लगाने नदी पहुंचे थे, वहीं पीलीभीत के पूरनपुर तहसील क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया। शारदा नदी के धनाराघाट पर स्नान के दौरान तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई। इस घटना ने इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
रविवार को चंदिया हजारा गांव निवासी सुमित ढाली (15 वर्ष) और सौरभ शारदा नदी में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। उन्हें डूबता देख पास में ही मौजूद जेठापुर निवासी अवधेश ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी। हालांकि, पानी की गहराई और तेज बहाव के कारण अवधेश भी खुद को संभाल नहीं सका और तीनों ही नदी की लहरों में समा गए।
परिजनों में कोहराम और बचाव कार्य
हादसे के बाद घाट पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने शोर मचाकर उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना पर पहुंचे गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों के शव बरामद किए। शव निकलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक अवधेश, जो अपने मिलनसार स्वभाव के लिए जाना जाता था, के पीछे उसकी दो मासूम बेटियां अनाथ हो गईं। वहीं चंदिया हजारा गांव के दो किशोरों की मौत से पूरा गांव शोक में डूबा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा। लोगों ने जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या जैसे बड़े पर्व पर भी धनाराघाट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। ग्रामीणों के अनुसार:
घाट पर न तो गोताखोर तैनात थे और न ही नाव या लाइफ जैकेट जैसी कोई सुविधा उपलब्ध थी।
चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरे का भी अभाव दिखा।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन हर साल केवल औपचारिकता निभाता है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है।
अधिकारियों ने लिया जायजा
घटना की जानकारी मिलते ही विधायक बाबूराम पासवान, एएसपी विक्रम दहिया, एसडीएम अजीत प्रताप सिंह और सीओ प्रतीक दहिया मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नदी घाटों पर पक्के सुरक्षा इंतजाम और प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी तै
नाती की मांग की है।
