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जौनपुर: सरकारी और स्कूल की जमीन पर 'फर्जीवाड़े' का खेल, तहसील प्रशासन पर मामले को दबाने का आरोप
  • 151009318 - KAMLESH KUMAR 1 1
    18 Jan 2026 18:48 PM



जौनपुर केराकत उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की केराकत तहसील से भ्रष्टाचार और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। मुर्तजाबाद गांव के एक निवासी ने राजस्व कर्मियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम समाज और एक जूनियर हाईस्कूल की करोड़ों की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी नामों पर दर्ज करा लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मुर्तजाबाद निवासी लालचन्द्र गौड़ ने उच्चाधिकारियों को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि गांव की आराजी संख्या 670ख (नवीन परती) और 670ग (ऊसर), जो ग्राम समाज की संपत्ति है, उसे बेचन पुत्र जयराम के वारिसानों ने फर्जी तरीके से अपने नाम करवा लिया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि नेहरू स्मारक जूनियर हाईस्कूल की सरकारी भूमि (आराजी संख्या 708) से भी 67 डिसमिल जमीन 'सुरेंद्रनाथ सुधीर शिक्षण संस्थान' के प्रबंधक द्वारा अपने नाम दर्ज करा ली गई है।

जांच में पुष्टि, फिर भी कार्रवाई सिफर

शिकायतकर्ता के अनुसार, 13 मार्च 2024 को तहसीलदार ने मामले का संज्ञान लेते हुए राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के साथ मौके पर जांच की थी। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि सरकारी जमीन को गलत तरीके से खुर्द-बुर्द किया गया है। लेकिन आरोप है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और जमीन खाली कराने के बजाय, तहसील के कर्मचारियों ने दोनों पक्षों के बीच 'जबरन समझौता' कराकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया।

कमिश्नर कोर्ट तक पहुंचा मामला

पीड़ित लालचन्द्र ने एसडीएम केराकत के न्यायालय में तजविसानी दाखिल की थी, जिसे 21 अगस्त 2024 को मंजूर कर लिया गया। मामले को अटकते देख विपक्षी सुधीर यादव ने वाराणसी कमिश्नर की अदालत में वाद (संख्या: C202414000002225) दाखिल कर दिया है, जिसकी अगली सुनवाई 09 फरवरी 2026 को होनी है। पीड़ित का कहना है कि यह सब केवल समय काटने और प्रशासन को गुमराह करने की रणनीति है।

पीड़ित की मांग

लालचन्द्र गौड़ ने मांग की है कि:

  1. फर्जी तरीके से दर्ज किए गए नामों को खारिज कर भूमि पुनः ग्राम समाज और स्कूल के नाम की जाए।

  2. भ्रष्टाचार में लिप्त राजस्व कर्मियों और फर्जीवाड़ा करने वाले दबंगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

  3. विवादित भूमि को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

अब देखना यह है कि जौनपुर जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और सरकारी भूमि की लूट पर क्या संज्ञान लेता है या फिर "फर्जीवाड़े का यह खेल" फाइलों में ही दबा रह जाएगा।



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