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ग्रामोदय विवि में कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती व वैश्विक खाद्य विपणन नीति पर सम्मेलन का शुभारंभ
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चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के सीएमसीएलडीपी सभागार में आज कृषि तकनीकी, प्राकृतिक खेती और वैश्विक खाद्य विपणन नीति विषयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन उदघाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर भरत मिश्रा ने की। प्रोफ़ेसर गुरु प्रसाद अध्यक्ष, गौ रक्षा विभाग, विश्व हिंदू परिषद लखनऊ और डॉक्टर प्रभात कुमार, उद्यान आयुक्त, आईसीएआर नई दिल्ली विशिष्ट अतिथि रहे। आयोजन सचिव के रूप में अखिल भारतीय अंत्योदय विचार मंच, प्रयागराज के डॉ रामचंद्र एवं आयोजन समन्वयक के रूप में अधिष्ठाता कृषि प्रोफेसर डी. पी. राय मंचासीन रहे। सम्मेलन के दोनों दिन विभिन्न तकनीकी सत्र होंगे।देश के अनेक राज्यों से आये कृषि वैज्ञानिकों ने उदघाटन सत्र में सहभागिता की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अभय महाजन ने कहा कि भारतरत्न राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख ने चित्रकूट को एक इकाई के रूप में मानकर यहाँ के गांवो और गांवो में रहने वाली आबादी तथा कृषि के विकास के लिए अनेक नवाचार करते हुए समयानुकूल मॉडल प्रस्तुत किए हैं, जिन पर विमर्श कर प्राकृतिक खेती, कृषि तकनीकी और वैश्विक खाद्य विपणन नीति विषयक इस सम्मेलन को विशिष्ट दिशा दी सकती है।
श्री महाजन ने नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर 26 एवं 27 फरवरी को उद्यमिता विद्यापीठ में आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित सतत विकास के लक्ष्य आदि विषयक संगोष्ठी में वैज्ञानिकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि यह देश की आजादी का अमृत काल है, हम सब का प्रयास होना चाहिए कि अपने कार्य छेत्रो के गुलामी के प्रतीकों को समाप्त करने में यथासंभव योगदान करें।

विशिष्ट अतिथि प्रो गुरु प्रसाद ने भारतीय खानपान, जीवन शैली, पर्वो, परम्पराओं पर बातचीत करते हुए कहा कि हमारे जीवन में कृषि का विशेष महत्व है।भारतीय ऋषियों ने मनुष्यों, पशुओं के साथ साथ कृषि की भी संहिता की रचना की है, किंतु कृषि संहिता का अध्ययन - अध्यापन के अभाव में कृषि की समस्याओं व संभावनाओ के संबंध में ठीक दिशा नही मिल पा रही हैं। डॉ गुरु प्रसाद ने कृषि संहिता को आत्मसात करने का आवाहन करते कहा कि मौसम के अनुरूप छेत्रीय कृषि नीति तैयार की जाय।

विशिष्ट अतिथि उद्यान आयुक्त डॉ प्रभात कुमार ने प्राकृतिक खेती की संभावना पर भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और समयानुकूल तकनीकी को अपना कर वैश्विक कृषि विपणन की नीति के लिए सुझाव दिए जा सकते हैं।

अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने कृषि के महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि पौराणिक काल से भारत में कृषि को सर्व सम्मानित विधा माना जा रहा है। आर्थिक कारणों से लोगों द्वारा अन्य व्यवसायों में रुचि लेने की वजह से अब कृषि कम आय वाला कहा जाने लगी है। वास्तव मे ऐसा नहीं है। तकनीकी, प्राकृतिक खेती और सुस्पष्ट नीति बनाकर कृषि व्यवसाय को सर्वश्रेष्ठ बनाया जा सकता है। इसके लिए आवश्यकता है प्राकृतिक खेती में नवाचार करने और जीवनशैली में बदलाव करने की।
सम्मेलन का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया है। अतिथियों के शाल, श्रीफल व स्मृति चिन्ह से सत्कार के बाद कार्यक्रम समन्वयक प्रो डीपी राय ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।आयोजन सचिव प्रो राम चन्द्र ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि व औचित्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन कुलसचिव प्रो आर सी त्रिपाठी ने किया।सम्मेलन महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, आर पी शोध संस्थान व अखिल भारतीय अंत्योदय विचार मंच प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।इस अवसर पर पूसा नईदिल्ली के वैज्ञानिक डॉ अमित गोस्वामी, दीन दयाल शोध संस्थान के सचिव अमित वशिष्ठ, आईसीएआर लखनऊ के डॉ मनोज त्रिपाठी व डॉ संजय यादव ,अनेक राज्यों से कृषि वैज्ञानिक, ग्रामोदय विवि के प्राध्यापक व विद्यार्थी मौजूद रहे।

तकनीकी सत्र में हुई शोध प्रस्तुतियां


शुभारंभ के बाद सम्पन्न तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो डीपी राय ने की।को चैयरमैन डॉ पावन सिरोठिया व रिपोर्टिंग डॉ वाई के सिंह ने की। चार कृषि वैज्ञानिकों के आमंत्रित व्याख्यान हुए और दो ने मौखिक प्रस्तुति दी।


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