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मां दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए काेलकाता से बुलाए गए है कारीगर
  • 151118605 - DIKSHA PANDEY 0



नई दिल्ली, दो वर्ष बाद दुर्गा पूजा के लिए मूर्ति बनाने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। कारीगरों में उत्साह का माहौल है। हालांकि पिछले वर्ष आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से दुर्गा पूजा आयोजन के लिए अनुमति मिल गई थी, पर कोविड-19 प्रोटोकाल के कड़े नियमों व फंड के अभाव के चलते कुछ एकाध समितियों की ओर से आयोजन किया गया था। पर इस बार किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है, ऐसे में मूर्तिकार अधिक संख्या में मूर्ति तैयार कर रहे है।

जनकपुरी स्थित कालीबाड़ी मंदिर में हर साल की तरह मूर्ति बना रहे प्रदीप बताते हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने काफी हिम्मत करते हुए करीब 30 मूर्तियां तैयार की थी। सभी छोटे आकार की थी, पर उनकी बिक्री भी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण बन गया था। क्योंकि ग्राहक सामने नहीं आ रहे थे। पर इस बार रौनक का माहौल है और ऐसे में अच्छे कारोबार की उम्मीद को मद्देनजर रखते हुए 50 से अधिक मूर्तियां तैयार कर रहा हूं।

कई समितियों के आर्डर मिल गए है

अभी पश्चिम बंगाल से दस कारीगरों को मदद के लिए बुलाया गया है। पर समय पर आर्डर पूरा हो इसके लिए जल्द ही दो और कारीगर आने वाले है।दुर्गा पूजा का त्योहार मां दुर्गा और महिषासुर राक्षस के बीच हुए युद्ध में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के लिए मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश की मूर्ति को तैयार किया जा रहा है। तीन राज्यों की मिट्टी से बन रही मूर्तियों को तैयार करने का सिलसिला तकरीबन दो महीने पहले शुरू हो गया था। दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र न केवल मां की प्रतिमा बल्कि पंडाल का डिजाइन भी चर्चा का विषय रहता है। ऐसे में पंडाल व मूर्ति बनाने के लिए कारीगरों को कोलकाता से बुलाया जाता |

बारीकियों पर चल रहा है कार्य

पर्यावरण से जुड़े सरोकार को ध्यान में रखते हुए इस बार भी मूर्ति को बनाने में इको फ्रेंडली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इस बार भी इको फ्रेंडली विसर्जन को मद्देनजर रखते हुए मां दुर्गा की छोटी मूर्ति बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मूर्तिकार प्रदीप बताते हैं कि आर्डर पर ही 11 से 12 फुट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही है। कई समितियों से मिले आर्डर पर पूर्ण रूप से प्राकृतिक मूर्ति भी तैयार की जा रही है। उसमें मां के बाल, कपड़े सभी मिट्टी से बनाएं जा रहे है और साथ ही उसमें कोई रंग का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। प्रदीप बताते हैं कि मूर्ति का ढांचा अब करीब-करीब बनकर तैयार है, फिलहाल मूर्ति की बारिकियों पर काम किया जा रहा और इसके बाद मूर्ति में रंग भरने व श्रृंगार के काम की शुरुआत की जाएगी।

बारिश व महंगाई ने किया परेशान

मूर्तिकार प्रदीप बताते हैं कि इन दिनों बारिश की वजह से काम काफी प्रभावित हो रहा है। बारिश की एक बूंद पूरी मेहनत बिगाड़ सकती है। इसलिए मूर्तियों को ढक कर रखा गया है। जगह के अभाव में बारिश की बूंदों से मूर्तियों को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। दूसरा महंगाई की मार के कारण आर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल कार्य बना हुआ है |

 

 

 

  

 

 
 

 


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