EPaper Join LogIn
एक बार क्लिक कर पोर्टल को Subscribe करें खबर पढ़े या अपलोड करें हर खबर पर इनकम पाये।

कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है जहाँ को अपनी तबाही का इंतिज़ार सा है
  • 151143206 - RAKESH 0 0
    31 Jul 2021 23:24 PM



कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है | कैफ़ी आज़मी

कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है
जहाँ को अपनी तबाही का इंतिज़ार सा है

मनु की मछली, न कश्ती-ए-नूह और ये फ़ज़ा
कि क़तरे-क़तरे में तूफ़ान बेक़रार सा है

मैं किसको अपने गरेबाँ का चाक दिखलाऊँ
कि आज दामन-ए-यज़दाँ भी तार-तार-सा है

सजा-सँवार के जिसको हज़ार नाज़ किए
उसी पे ख़ालिक़-ए-कोनैन शर्मसार सा है

तमाम जिस्म है बेदार, फ़िक्र ख़ाबीदा
दिमाग़ पिछले ज़माने की यादगार सा है

सब अपने पाँव पे रख-रख के पाँव चलते हैं
ख़ुद अपने दोश पे हर आदमी सवार सा है

जिसे पुकारिए मिलता है इस खंडहर से जवाब
जिसे भी देखिए माज़ी के इश्तेहार सा है

हुई तो कैसे बियाबाँ में आके शाम हुई
कि जो मज़ार यहाँ है मेरे मज़ार सा है

कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़लाब का जो आज तक उधार सा है



Subscriber

188493

No. of Visitors

FastMail

VARANASI - रुद्राक्ष और मेवों से बना सेहरा पहन निकलेंगे बाबा विश्वनाथ, दूल्हे के रूप में सजेंगे     VARANASI - बाबतपुर एयरपोर्ट टनल की खुदाई के दौरान गिरा दो मंजिला मकान, बाल-बाल बचे लोग     VARANASI - नमो और आदि केशव के बीच बनेगा नया मॉडल घाट, क्यूआर कोड से खुलेगा काशी का प्राचीन इतिहास     VARANASI - एक दिन में 212 शादियां, 20 मिनट का सफर एक घंटे में हुआ पूरा     VARANASI - दालमंडी ध्वस्तीकरण की 15 तस्वीरें, कड़ी सुरक्षा के बीच बुलडोजर से ध्वस्त किए गए 14 नए भवन