EPaper Join LogIn
एक बार क्लिक कर पोर्टल को Subscribe करें खबर पढ़े या अपलोड करें हर खबर पर इनकम पाये।

बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँ ख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग
  • 151143206 - RAKESH 0 0
    31 Jul 2021 23:10 PM



तलाश | कैफ़ी आज़मी

ये बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँ
ख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग भर सकता नहीं
आ उतर आ काँपते होंटों पे ऐ मायूस आह
सक़्फ़-ए-ज़िन्दाँ पर कोई पर्वाज़ कर सकता नहीं
झिलमिलाए मेरी पलकों पे मह-ओ-ख़ुर भी तो क्या?
इस अन्धेरे घर में इक तारा उतर सकता नहीं

लूट ली ज़ुल्मत ने रू-ए-हिन्द की ताबिन्दगी
रात के काँधे पे सर रख कर सितारे सो गए
वो भयानक आँधियाँ, वो अबतरी, वो ख़लफ़शार
कारवाँ बे-राह हो निकला, मुसाफ़िर खो गए
हैं इसी ऐवान-ए-बे-दर में यक़ीनन रहनुमा
आ के क्यूँ दीवार तक नक़्श-ए-क़दम गुम हो गए

देख ऐ जोश-ए-अमल वो सक़्फ़ ये दीवार है
एक रौज़न खोल देना भी कोई दुश्वार है



Subscriber

188810

No. of Visitors

FastMail

VARANASI - अमिताभ ठाकुर मामले में चौक पुलिस को फटकार     चंदौली - पुलिस चेकिंग देख पुल से गंगा में कूदे दो गो-तस्कर, एक की डूबने से मौत     VARANASI - एंटी रोमियो टीम ने दो महिलाओं को दबोचा     MAU - आपका एक कदम बचा सकता है किसी की जान     VARANASI - व्हाट्सएप चैट से खुलेगा कमीशन का खेल, एक मोबाइल से दिन में 10 बार हुई बातचीत     VARANASI - सीबीआई के रडार पर रेलवे अधिकारी     VARANASI - काशी विश्वनाथ धाम में नई व्यवस्था, मणिकर्णिका गली और गंगा द्वार से सीधे पहुंचेंगे गेट नंबर 4 तक