Sunday, 8/1/2021 11:08:14 PM




15104612201/08/2021
जमानियां नगर में भाजपाइयों ने किया प्रदेश कोषाध्यक्ष पिछड़ा मोर्चा ओमप्रकाश गुप्ता का जोरदार स्वागत

यूपी के गाजीपुर जिले के जमानियां नगर में भाजपाइयों ने किया और पढ़ें ।

 
15110695701/08/2021
2 दिन से हो रही बारिश में दो गरीब परिवार का मकान ढहा

 यूपी के जौनपुर जिले के खेतासराय थाना क्षेत्र के मनेछा गाँव और पढ़ें ।

 
15105091701/08/2021
ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश

यूपी के वाराणसी जिले के जंसा थाना क्षेत्र के सिहोरवाॅ गांव व आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई दिनो और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
झिझक एक सादा पयाम

पहला सलाम | कैफ़ी आज़मी

एक रंगीन झिझक एक सादा पयाम
कैसे भूलूँ किसी का वो पहला सलाम
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए । हम चाँद से आज लौट

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए | कैफ़ी आज़मी

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए | कैफ़ी आज़मी

और पढ़ें ।
 
15114320631/07/2021
यहाँ तक कि उससे जुदा हो गया मैं जुदा हो गया मैं,

मैं यह सोचकर उसके दर से उठा था | कैफ़ी आज़मी

पशेमानी[1]

मैं यह सोचकर उसके दर से उ और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता नई ज़मीं नया आसमाँ

मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता | कैफ़ी आज़मी

मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिल और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा

मेरे दिल में तू ही तू है | कैफ़ी आज़मी

मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
आँधी ये तूफ़ान ये तेज़ धारे कड़कते तमाशे

मशवरे | कैफ़ी आज़मी

पीरी:
ये आँधी ये तूफ़ान ये तेज़ धारे
कड़कते तमाशे गरजते नज़
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
बहुत गर्म हवा चलती है आज की रात न फ़ुटपाथ

मकान | कैफ़ी आज़मी

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है
आज की रात न फ़ुटपाथ पे नींद आएगी<
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
तुम परेशान न हो बाब-ए-करम वा न करो और कुछ देर पुकारूँगा

नज़राना | कैफ़ी आज़मी

तुम परेशान न हो बाब-ए-करम वा न करो
और कुछ देर पुकारूँगा चला जा
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
लो पौ फटी वह छुप गई तारों की अंज़ुमन लो जाम-ए-महर से वह

दोशीज़ा मालिन | कैफ़ी आज़मी

लो पौ फटी वह छुप गई तारों की अंज़ुमन
लो जाम-ए-महर से वह
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
जीत-हार तो इस दौर का मुक्द्दर है ये दौर जो के पुराना

दो-पहर | कैफ़ी आज़मी

ये जीत-हार तो इस दौर का मुक्द्दर है
ये दौर जो के पुराना नही नया
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
इन्हीं दीवारों से टकराता हूँ रोज़ बसते हैं

दायरा | कैफ़ी आज़मी

रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे
फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ
बारहा
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
हम पे बहुत हँसे थे फ़रिश्ते सो देख लें हम भी क़रीब गुम्बदे

दस्तूर क्या ये शहरे-सितमगर के हो गए | कैफ़ी आज़मी

दस्तूर[1] क्या ये शहरे-सितमगर[2] के हो और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो और कुछ देर पुकारूंगा

तुम परेशां न हो | कैफ़ी आज़मी

तुम परेशां न हो बाब-ए-करम-वा न करो
और कुछ देर पुकारूंग
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
आँखों में नमी हँसी लबों पर क्या हाल है क्या दिखा रहे

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो | कैफ़ी आज़मी

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या ग़म है जि
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
शगुफ्तगी का लताफ़त का शाहकार हो तुम, फ़क़त बहार नहीं

तुम | कैफ़ी आज़मी

शगुफ्तगी का लताफ़त का शाहकार हो तुम,
फ़क़त बहार नहीं हासिल-ऐ-बहार
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
एक दो भी नहीं छब्बीस दिये एक इक करके जलाये

चरागाँ | कैफ़ी आज़मी

एक दो भी नहीं छब्बीस दिये
एक इक करके जलाये मैंने

इक दिय और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
आज अन्धेरा मिरी नस-नस में उतर जाएगा आँखें बुझ जाएँगी बुझ जाएँगे एहसास

ज़िन्दगी | कैफ़ी आज़मी

आज अन्धेरा मिरी नस-नस में उतर जाएगा
आँखें बुझ जाएँगी बुझ जाएँ
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
खार-ओ-खस तो उठें, रास्ता तो चले मैं अगर थक गया, काफ़ला तो चले

खार-ओ-खस तो उठें, रास्ता तो चले | कैफ़ी आज़मी

खार-ओ-खस तो उठें, रास्ता तो चले
मैं अग
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
कोई ये कैसे बता ये के वो तन्हा क्यों हैं वो जो अपना था वो

कोई ये कैसे बता ये कि वो तन्हा क्यों हैं | कैफ़ी आज़मी

कोई ये कैसे बता ये के वो तन्हा क्य और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
ख़ारो-ख़स[1] तो उठें, रास्ता तो चले मैं अगर थक गया, काफ़िला

काफ़िला तो चले | कैफ़ी आज़मी

ख़ारो-ख़स[1] तो उठें, रास्ता तो चले
मैं अगर थक गया, काफ
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो अब तुम्हारे हवाले वतन

कर चले हम फ़िदा | कैफ़ी आज़मी

कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन स
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है जहाँ को अपनी तबाही का इंतिज़ार सा है

कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है | कैफ़ी आज़मी

कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है
जह
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
क़ल्ब-ए-माहौल[1] में लर्ज़ां[2] शरर-ए-जंग[3] हैं आज हौसले वक़्त के और ज़ीस्त[4

औरत | कैफ़ी आज़मी

उठ मेरी जान!! मेरे साथ ही चलना है तुझे

क़ल्ब-ए-माहौल[1] में लर् और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है? तेरी हर लहर से बारूद की बू आती

ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है? | कैफ़ी आज़मी

ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है?
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
जब भी चूम लेता हूँ उन हसीन आँखों को सौ चराग अँधेरे में जगमगाने लगते हैं

एक बोसा | कैफ़ी आज़मी

जब भी चूम लेता हूँ उन हसीन आँखों को
सौ चराग अँधेरे में जगमगाने
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
अब और क्या तेरा बीमार बाप देगा तुझे

एक दुआ | कैफ़ी आज़मी


अब और क्या तेरा बीमार बाप देगा तुझे
बस एक दुआ कि ख़ुदा तु
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख़लल पड़े हँसने से हो सुकून ना रोने

इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख़लल पड़े | कैफ़ी आज़मी


इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता

गुरुदत्त के लिए नोहा | कैफ़ी आज़मी

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
तुम ख़ुदा हो ख़ुदा के बेटे हो या फ़क़त[2] अम्न[3

इब्ने-मरियम | कैफ़ी आज़मी

इब्ने-मरियम[1]

तुम ख़ुदा हो
ख़ुदा के बेटे हो
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
तुम भी महबूब मेरे तुम भी हो दिलदार मेरे आशना मुझ से मगर तुम भी नहीं

आवारा सजदे | कैफ़ी आज़मी

इक यही सोज़-ए-निहाँ कुल मेरा सरमाया है
दोस्तो मैं किसे ये स
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
आज सोचा तो आँसू भर आए मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए

आज सोचा तो आँसू भर आए | कैफ़ी आज़मी

आज सोचा तो आँसू भर आए
मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए<
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है, आज की रात न फ़ुटपाथ

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है | कैफ़ी आज़मी

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है,
आज की
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
यहाँ तो चलती हैं छुरिया ज़ुबाँ से पहले ये मीर अनीस की,

अज़ा में बहते थे आँसू यहाँ | कैफ़ी आज़मी

अज़ा में बहते थे आँसू यहाँ, लहू तो नहीं
ये
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
अब तुम आग़ोश-ए-तसव्वुर[1] में भी आया न करो छूट जाने दो जो

अब तुम आग़ोश-ए-तसव्वुर | कैफ़ी आज़मी

अब तुम आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी आया न करो
मुझ से
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
अंदेशे | कैफ़ी आज़मी रूह बेचैन है इक दिल की

अंदेशे | कैफ़ी आज़मी

रूह बेचैन है इक दिल की अज़ीयत क्या है
दिल ही शोला है तो ये सोज़
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
या समुन्दर में मीनार-ए-नूर या कोई फ़िक्र-ए-

नेहरू | कैफ़ी आज़मी

मैं ने तन्हा कभी उस को देखा नहीं
फिर भी जब उस को देखा वो तन्हा म
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
रूह चेहरों पे धुआँ देख के शरमाती है झेंपी झेंपी सी मिरे

प्यार का जश्न | कैफ़ी आज़मी

प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा
ग़म किसी दिल में सही ग़म
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
नुक़ूश-ए-हसरत मिटा के उठना, ख़ुशी का परचम उड़ा के उठना मिला के सर

नए ख़ाके | कैफ़ी आज़मी

नुक़ूश-ए-हसरत मिटा के उठना, ख़ुशी का परचम उड़ा के उठना
मिला क
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
सेहत-बख़्श तड़का ये सहर की जल्वा-सामानी उफ़ुक़ सारा बना जाता

नई सुब्‍ह | कैफ़ी आज़मी

ये सेहत-बख़्श तड़का ये सहर की जल्वा-सामानी
उफ़ुक़ सारा ब
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
कितनी रंगीं है फ़ज़ा कितनी हसीं है दुनिया कितना सरशार है ज़ौक़-ए-

नया हुस्न | कैफ़ी आज़मी

कितनी रंगीं है फ़ज़ा कितनी हसीं है दुनिया
कितना सरशार है ज़ौ
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे फिर वहीं लौट के आ

दाएरा | कैफ़ी आज़मी

रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे
फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ
बार-ह
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँ ख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रंग

तलाश | कैफ़ी आज़मी

ये बुझी सी शाम ये सहमी हुई परछाइयाँ
ख़ून-ए-दिल भी इस फ़ज़ा में रं
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
राम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो

दूसरा बनबास | कैफ़ी आज़मी

राम बन-बास से जब लौट के घर में आए
याद जंगल बहुत आया जो नगर
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
मरमरीं-मरमरीं फूलों से उबलता हीरा चाँद की आँच में

दोस्त ! मैं देख चुका ताजमहल
...वापस चल

मरमरीं-मरमरीं फूलों से उबलता हीरा
चाँद क
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
लो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमन लो जाम-ए-महर से वो छलकने लगी

दोशीज़ा मालन | कैफ़ी आज़मी

लो पौ फटी वो छुप गई तारों की अंजुमन
लो जाम-ए-महर से वो छल
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
कोहरे के खेत | कैफ़ी आज़मी वो सर्द रात जबकि सफ़र कर

कोहरे के खेत | कैफ़ी आज़मी

वो सर्द रात जबकि सफ़र कर रहा था मैं
रंगीनियों से जर्फ़-ए-
और पढ़ें ।

 
15114320631/07/2021
अब तमद्दुन[1] की हो जीत के हार मेरा माज़ी है अभी तक मेरे काँधे पर

मेरा माज़ी मेरे काँधे पर | कैफ़ी आज़मी

अब तमद्दुन[1] की हो जीत के हार
मेरा माज़ी है
और पढ़ें ।